ट्रम्प ने पिछले साल ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से निकलने के बाद ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे, ताकि तेहरान को नए समझौते के लिए बाध्य कर सकें।
ट्रम्प ने पिछले साल ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से निकलने के बाद ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे, ताकि तेहरान को नए समझौते के लिए बाध्य कर सकें।
ट्रम्प ने ईरान को झुकाने के लिए प्रतिबंध और धमकियों की नीति अपना रखी है।
अमरीकी राष्ट्रपति ने अपने एक ताज़ा ट्वीट में कहा है, ईरानी नेता अच्छाई और हमदर्दी को नहीं समझ रहे हैं। दुर्भाग्यवश वे केवल शक्ति और बल की ज़बान समझते हैं। अमरीका के पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है, केवल पिछले दो वर्षों में उस पर 1.5 ट्रिलियन डॉलर का निवेश किया गया है।
ट्रम्प ने आगे कहा, ईरान का आज का बहुत ही जाहिलाना व अपमानजनक बयान, दर्शाता है कि वे वास्तविकता नहीं समझ रहे हैं। अमरीका की किसी भी चीज़ पर ईरानी हमले का मुंह तोड़ जवाब दिया जाएगा, कुछ अवसरों पर मुंह तोड़ का मतलब विनाशकारी होता है। क्योंकि यह जॉन केरी और ओबामा का समय नहीं है।
अमरीकी राष्ट्रपति ऐसी स्थिति में ईरान को शिष्टाचार और हमदर्दी का पाठ पढ़ा रहे हैं कि जब पिछले एक साल के दौरान उन्होंने ईरानी जनता के ख़िलाफ़ भरपूर आर्थिक युद्ध छेड़ रखा है।
दूसरी ओर ट्रम्प ऐसी स्थिति में अमरीकी सैन्य शक्ति और सेना पर ट्रिलिनों डॉलर ख़र्च करने की बात कर रहे हैं, जब ईरान द्वारा अमरीकी आधुनितकतम ड्रोन को स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली से मार गिराए जाने के बाद जवाबी हमले का सपना देखते रह गए। ऐसा लगता है कि वह बड़ी बड़ी बातें करके ईरानियों को प्रभावित करना और डराना चाहते हैं, हालांकि वह इस बात से अनजान हैं कि अगर ईरानियों को अमरीका की सैन्य शक्ति का भय होता तो वे कभी भी अमरीकी ड्रोन को नहीं गिराते।
इस घटना के बाद ईरान को लेकर ट्रम्प का धमकी भरा लहजा काफ़ी बदल गया था और उन्होंने अमरीका के एक अन्य सैन्य विमान को नहीं गिराने के लिए तेहरान का शुक्रिया अदा किया था।
वास्तव में ईरान के वरिष्ठ नेता पर अमरीकी प्रतिबंधों पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा था कि अमरीकी अजीबो ग़रीब हरकतें कर रहे हैं, ऐसा प्रतीत होता है कि उनकी बुद्धि मारी गई है और व्हाइट हाउस की समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करे?